भोपाल-आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्य नंद गिरी महाराज धर्मगुरु मिर्ची बाबा ने गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दी है। एवं गुरु शिष्य का महत्व बताते हुए कहा  कि भारतवर्ष में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है प्राचीन काल से ही शिष्य जब गुरु के आश्रम में निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे तो इसी दिन पूर्ण श्रद्धा से अपने गुरु की पूजा का आयोजन किया करते थे। उन्होंने श्लोक के माध्यम से गुरु शिष्य परंपरा का महत्व बताते हुए कहा
कि 
गुरू गृह पढन गए रघुराई 
अल्प काल विधा सब आई 
गुरुर ब्रह्मा गुरुर विष्णु गुरुर देवो महेश्वरा गुरुर साक्षात परब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नमः
      स्वामी वैराग्य नंद गिरी महाराज मिर्ची बाबा ने इस श्लोक अर्थ समझाते हुए कहा कि प्रथम गुरु माता पिता है, द्वितीय गुरु आपके शिक्षा गुरु हैं, तृतीय दीक्षा गुरु है उन्होंने कहा कि गुरु का स्त्रोत कभी खत्म नहीं होता है। गुरु अनादि से और रहेंगे जीवन में जिसने तुम्हें ज्ञान दिया हो साहस दिया हो मनोबल दिया हो जीने का तरीका सिखाया हो हर परिस्थिति में आप अपना जीवन जी सकें ऐसा उपदेश दिया हो वह जीवन के गुरु होते हैं। गुरु पूर्णिमा के अवसर पर अपने गुरुदेव के दर्शन अवश्य करें। यदि कोरोना महामारी के चलते अपने गुरु तक नहीं पहुंच सकते वह तो सोशल मीडिया के माध्यम से अपने गुरुदेव के दर्शन अवश्य करें।
        महाराज जी ने बताया कि रामकृष्ण जी ने अपने प्रसंग में कहां है कि आगे आगे चेला, अपना हाथ संसार के हाथों में देने से अच्छा है। अपने गुरुदेव के हाथ में दे दे क्योंकि गुरुदेव पार लगाने वाली नाव है। गुरु के नाम में जो बैठ गया वह तो भवसागर के भी पार हो जाता है। जीवन मरण बेबी पार हो जाता है। हमेशा अपने गुरुदेव के दिए हुए मंत्रों का जाप करें दुनिया में गुरु के आलोचना और निंदा आप अपने कानों से कभी ना सुने, बस मैं गुरुदेव का हूं और गुरुदेव मेरे हैं
ऐसा मानकर अपार श्रद्धा अपने गुरुदेव के प्रति रखें। गुरुदेव ज्ञान की खदान है। और खदान में से पत्थर और हीरा दोनों निकलते हैं। गुरुदेव के ज्ञान व प्रकाश से आप समाज में हीरा बन कर ख्याति और ऐश्वर्या प्राप्त करें। यही गुरु का प्रताप है।
          महाराज जी ने कहा कि मेरे लिए सर्वत्र गुरु हैं। और गुरु ही मेरे जीवन का मार्ग चुनते हैं। जय गुरुदेव, अनंत गुरुदेव, विराट गुरुदेव, ज्ञान गुरुदेव, साहस गुरुदेव, यह सब गुरुदेव की पूंजी है। हम सब गुरुदेव की बगिया के खिलते हुए फूल हैं। और हमेशा खेलते रहेंगे।
      लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती कोशिश करने वाले शिष्यों की कभी हार नहीं होती बस गुरुदेव के चरणों में सदैव मेरा मस्तक झुकता रहेगा, स्वाभिमान गिरने नहीं दूंगा, और अहंकार आने नहीं दूंगा।



 
भोपाल। मप्र में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभाग बंटवारे को लेकर जबर्दस्त खींचतान की खबरें आ रही हैं। मंत्रिमंडल की तरह विभागों का बंटवारा भी दिल्ली से ही होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आज रात दिल्ली रवाना हो रहे हैं।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में आने के बाद ऊपर से बेशक भाजपा नेता खुश हों, लेकिन सिंधिया की शर्तों और अपेक्षाओं ने भाजपा को बैकफुट पर ला दिया है। मंत्रिमंडल विस्तार में सिंधिया ने अपनी ताकत का अहसास कराकर दिया अपने कोटे से 11 और तीन अन्य समर्थक पूर्व विधायकों मंत्री बनवा लिया। सिंधिया के भोपाल के दो दिन के प्रवास में मुख्यमंत्री और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष जिस तरह उनके आगे पीछे घूमे, उससे तय है कि अब मप्र भाजपा में सिंधिया के कद का दूसरा नेता नहीं है।

विभाग बंटवारे पर खींचतान
खबर है कि जिस प्रकार मंत्रियों के चयन का अधिकार मुख्यमंत्री से छीना गया, वैसे ही अब विभागों के वितरण को लेकर भी शिवराज सिंह चौहान स्वतंत्र नहीं हैं। दिल्ली भाजपा हाईकमान ज्योतिरादित्य सिंधिया को भरोसे में लेकर ही विभागों का बंटवारा करेगा। सूत्रों के अनुसार सिंधिया ने अपने समर्थक मंत्रियों के लिए राजस्व, सामान्य प्रशासन, स्वास्थ्य, ऊर्जा, महिला बाल विकास, नगरीय प्रशासन, वाणिज्य कर, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति, परिवहन आदि विभाग मांगे हैं। भाजपा शायद यह सभी विभाग सिंधिया समर्थकों न दे। क्योंकि इनमें कुछ विभाग ऐसे हैं जिन्हें मुख्यमंत्री अपने पास रखना चाहेंगे। बताया जाता है कि खींचतान के कारण सोमवार से पहले विभागों का वितरण होना संभव नहीं है।



भोपाल - आचार्य महामंडलेश्वर आनंद गिरी महाराज ने कहा कि हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। भारतवर्ष में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। प्राचीन काल में शिष्य जब गुरु के आश्रम मैं निशुल्क शिक्षा ग्रहण करते थे, तो इसी दिन पूर्ण श्रद्धा से अपने गुरु की पूजा का आयोजन किया करते थे। इस दिन केवल गुरु की ही नहीं,अपी तू घर में अपने से जो भी बड़ा है। अर्थात माता- पिता ,भाई- बहन आदि को गुरुतुल्य समझ कर उनसे आशीर्वाद लिया जाता है
         आचार्य महामंडलेश्वर आनंद गिरी महाराज ने गुरु पूर्णिमा का महत्व को समझाते हुए कहा कि हिंदू धर्म ग्रंथों के अनुसार महाभारत के रचयिता कृष्ण द्वैपायन व्यास का जन्म दिवस भी माना जाता है। वे संस्कृत के महान विद्वान थे। महाभारत जैसा महाकाव्य उन्हीं की देन है। इसी के 18 वे अध्याय में भगवान श्री कृष्ण गीता का उपदेश देते हैं। सभी अट्ठारह पुराणों का रचयिता भी महर्षि वेदव्यास को माना जाता है। वेदों को विभाजित करने का श्रेय भी इन्हीं को दिया जाता है। इसी कारण इनका नाम वेदव्यास पड़ा था। वेदव्यास जी को आदि गुरु भी कहा जाता है इसलिए गुरु पूर्णिमा को व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है।
                आचार्य महामंडलेश्वर आनंद गिरी महाराज ने सभी देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए अपील की है। की इस वर्ष कोरोना महामारी के चलते सभी गुरु पूर्णिमा अपने घरों में रहकर ही मनाएं। क्योंकि देश अभी भी कोरोना संक्रमण जैसी आक्रमक महामारी से गुजर रहा है, ऐसे में सभी का जीवन सुरक्षित रहे। कोरोना संक्रमण की सांखला टूट जाए यह प्राथमिकता होना चाहिए, उन्होंने अपने अनुयायियों एवं शिष्यों से स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है।कि किसी को आश्रम आने की आवश्यकता नहीं है, ऐसा इसलिए कहा है। कि प्रतिवर्ष भक्तों एवं शिष्यों की भीड़ जुट जाती है। लाख प्रयास के बाद भी जुटने वाली भीड़ में सामाजिक दूरी का पालन करना एवं कराना संभव नहीं है।इसलिए अपने अपने घरों में रहकर श्रद्धा पूर्वक गुरु पूर्णिमा पर्व मनाते हुए कोरोना जैसी भयानक बीमारी को हराने के लिए सरकार के निर्देशों का पालन करें




भोपाल ब्यूरो सुनील परमार - आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्य नंद गिरी धर्मगुरु मिर्ची बाबा ने महान दार्शनिक और विख्यात आध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद जी की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन किया है। स्वामी वैराग्य नंद महाराज ने विवेकानंद जी के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए कहा कि स्वामी जी ने भारत ही नहीं पूरी दुनिया को मानवता कल्याण का मार्ग दिखाया।दुनिया में हिंदू धर्म और भारत की प्रतिष्ठा स्थापित करने वाले विवेकानंद जी ने एक आध्यात्मिक हस्ती होने के बावजूद युवाओं के दिलों में अमिट छाप छोड़ी।उन्हें देश और युवाओं से काफी प्यार था। 

         मिर्ची बाबा ने कहा कि स्वामी जी का "उठो जागो और तब तक नहीं रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो जाए" का आवाहन युवाओं को सदैव प्रेरित करता है। स्वामी जी के अमूल्य विचार सदियों तक पीढ़ियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे
         
         आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी वैराग्य नंद गिरी धर्मगुरु मिर्ची बाबा ने बताया कि वर्ष 1893 मैं विश्व धर्म संसद में उनके ओजपूर्ण भाषण से ही विश्व मंच पर न केवल हिंदू धर्म बल्कि भारत की भी प्रतिष्ठा स्थापित हुई। 11 सितंबर 1893 को इस संसद में जब उन्होंने अपना संबोधन अमेरिका के भाइयों और बहनों से प्रारंभ किया तब काफी देर तक तालियों की गड़गड़ाहट होती रही। उनके तर्कपूर्ण भाषण से लोग अभिभूत हो गए। उन्हें निमंत्रणों का ताता लग गया। स्वामी विवेकानंद ने देश और दुनिया का काफी भ्रमण किया। वह नर सेवा को ही नारायण सेवा मानते थे। उन्होंने रामकृष्ण के नाम पर रामकृष्ण मिशन और मठ की स्थापना की। 4 जुलाई 1902 को उन्होंने बेल्लूर मठ में अपने गुरु भाई स्वामी प्रेमानंद को मठ के भविष्य के बारे में निर्देश देने के बाद महासमाधि ले ली।

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